इंदिरा गांधी ने सत्ता के बल पर मुलायम को हरवाया था विधानसभा चुनाव: रामगोपाल यादव

समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव ने मंगलवार को दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में सत्ता के बल पर सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव को चुनाव हरवाया था। दिवंगत मुलायम सिंह यादव की जयंती पर सैफई के महोत्सव पंडाल में आयोजित ‘धरती पुत्र दिवस’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामगोपाल ने कहा, ‘‘1979 में चौधरी चरण सिंह के इस्तीफा देने के बाद हुए लोकसभा चुनाव में, घाटमपुर से लेकर सहारनपुर तक की सारी 34 सीटें हमारी पार्टी के खाते में आ गईं। ऐसे में इंदिरा जी ने कहा कि यह कौन है, कैसे ऐसा हुआ कि हम सत्ता में आ गए और यहां सब सीटें हार गए। इस पर उनसे कहा गया कि मुलायम सिंह की वजह से ऐसा हुआ है। इस पर इंदिरा ने कहा कि इसे विधानसभा चुनाव हरवा दो और उन्हें सरकार के बल पर जबरदस्ती चुनाव हरवा भी दिया।
उन्होंने दावा किया, ”नेता जी (मुलायम सिंह यादव) को वोट भी नहीं डालने दिया गया था। उन्हें सुबह ही जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने अपनी गाड़ी में बैठा लिया था।” हालांकि रामगोपाल यादव ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस विधानसभा चुनाव की बात कर रहे हैं लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा 1980 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तरफ था, जब मुलायम को इटावा जिले की जसवंतनगर सीट पर कांग्रेस के बलराम सिंह यादव के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था। सपा के प्रमुख महासचिव ने अपने भाई मुलायम को याद करते हुए कहा कि ‘नेता जी’ ने गरीबों, पिछड़ों, दलितों और अगड़े वर्ग के कमजोर लोगों को स्वाभिमान से जीने का रास्ता दिखाया।

उन्होंने एक संस्मरण साझा करते हुए कहा कि 1980 के लोकसभा चुनाव में मुलायम ने जब रामसिंह शाक्य को इटावा सीट से सोशलिस्ट पार्टी का उम्मीदवार बनाया था तो क्षेत्र के कुछ लोगों ने शाक्य को ‘सब्जी बेचने वाला’ बताते हुए उन्हें प्रत्याशी बनाये जाने के औचित्य पर सवाल उठाये थे। इस पर मुलायम ने अपने कार्यकर्ताओं को बुलाकर ऐसा मंत्र दिया कि चुनाव में शाक्य को एकतरफा वोट मिले।
रामगोपाल यादव ने कहा, ”तब से यह हुआ कि सिर्फ एक बार चौधरी रघुराज सिंह यहां से कांग्रेस के सांसद हुए। वरना बाकी सारे सांसद हमारे ही हुए। नेता जी ने चार—चार बार सब्जी बेचने वालों को इटावा से सांसद बनाया।” उन्होंने कहा, ”जिन लोगों को कोई पूछता नहीं था, उन्हें सम्मान से जीने का हक नेताजी ने दिलाया। आज नेता जी आज हमारे बीच नहीं हैं। उनकी अनुपस्थिति में हम सब लोग काम कर रहे हैं। उन्हें सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके विचारों, उनकी पार्टी और उनके सहयोगियों को जितनी ताकत दे सकते हैं, आप जरूर दें।’

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