उद्धव ठाकरे पार्टी बचाने को ऐक्टिव, धनुष-बाण की लड़ाई पहले ही छोड़ा तीर, पहुंचे चुनाव आयोग

एकनाथ शिंदे गुट के विद्रोह के चलते शिवसेना ने सत्ता तो गंवाई ही है, पार्टी पर भी संकट के बाद मंडरा रहे हैं। उद्धव ठाकरे सत्ता से बेदखल होने के बाद फिलहाल पार्टी अपने पाले में ही रखने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। इसी बीच उनके गुट ने चुनाव आयोग का रुख किया है और कैविएट (प्रतिवाद) दाखिल किया है। इसमें उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले धड़े ने मांग की है कि पार्टी के सिंबल धनुष-बाण को लेकर कोई भी फैसला उनके पक्ष को सुनने के बाद ही लिया जाए। दरअसल शिवसेना के 55 विधायक हैं और उनमें से 40 ने एकनाथ शिंदे का समर्थन किया है। इसके अलावा 19 लोकसभा सांसदों में भी कई ऐसे हैं, जिनके उद्धव का साथ छोड़ने की आशंका है।
एकनाथ शिंदे गुट से पहले ही ऐक्टिव हुए उद्धव ठाकरे
ऐसे में एकनाथ शिंदे गुट की ओर से चुनाव आयोग में जाकर पार्टी और उसके सिंबल पर दावा ठोका जा सकता है। इस स्थिति से बचने के लिए ही उद्धव ठाकरे पहले ही ऐक्टिव हो गए हैं और चुनाव आयोग में कैविएट दाखिल की है। मराठी वेबसाइट लोकसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक उद्धव ठाकरे गुट ने कैविएट में मांग की है, ‘शिवसेना के धनुष-बाण चुनाव चिन्ह पर हमारा पक्ष सुने बिना कोई फैसला नहीं लिया जाए।’ शिंदे गुट धनुष और बाण के इस प्रतीक का दावा कर सकता है। इसीलिए कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे ने यह एहतियात बरती है और पहले ही चुनाव आयोग का रुख कर लिया है।

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