ओमप्रकाश राजभर भाजपा के साथ जाएंगे या नहीं, इन संकेतों के क्या हैं मायने?

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की भाजपा के साथ वापसी को लेकर दिए गए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान के बाद सियासी गलियारों में कई मायने निकाले जा रहे हैं। वहीं अपनी ही पार्टी में राजभर की बगावत और केवल सत्ता का स्वाद लेना चाह रहे हैं का आरोप। राजभर द्वारा सीएम योगी की बार-बार तरीफ करना। ऐसे कई संकेत हैं जो राजभर को भाजपा के साथ की चाह को दर्शा रहे हैं। चर्चा है कि राजभर की भाजपा से बातचीत चल रही है। हालांकि हकीकत क्या हैं इस पर्दा उठना अभी बाकी।
आपको बता दें कि ओपी राजभर के भाजपा में शामिल होने को लेकर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार को बड़ा बयान दिया था। डिप्टी सीएम ने कहा, वैकेंसी और नो वैकेंसी जैसी कोई बात नहीं है। जिसे पार्टी में आना है वो पहले अपनी बात रखे। इसके बाद पार्टी इस पर विचार करेगी। यह निर्णय वैसे भी पार्टी के आलाकमान को लेना है।
सुभासपा में बगावत के सुर तेज
सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के पार्टी सुभासपा में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। सोमवार को मऊ शहर के एक प्लाजा में ओपी राजभर के रिश्तेदार व पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेन्द्र राजभर ने अपने कई समर्थक के साथ पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। महेंद्र राजभर ने कहा कि जिन सिंद्धातों पर चलने का राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संकल्प लिया था, आज वह भटक गए हैं। परिवार को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे में अब पार्टी में कार्यकर्ताओं को छला महसूस हो रहा है। ऐसे में अब वह वजूद यहां नहीं है। सुभासपा अध्यक्ष केवल सत्ता का स्वाद लेना चाह रहे हैं जब चाहते किसी अन्य दल के साथ चले जाते। ऐसे में यह पार्टी अपने रास्ते से भटक गई है।

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