झारखंड में बढ़ी सियासी गर्मी, हेमंत सोरेन की सदस्यता पर सवाल

चुनाव आयोग द्वारा राज्यपाल रमेश बैस को भेजे गए एक पत्र के बाद गुरुवार से झारखंड में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं. आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश राज्यपाल से की है. निर्वाचन आयोग ने यह अनुशंसा बीजेपी द्वारा राज्यपाल से की गई उस शिकायत के संदर्भ में की है, जिसमें मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए उन पर लाभ लेने (ऑफिस ऑफ प्रॉफिट) का आरोप लगाया गया था. आयोग ने उन्हें जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा-9ए के उल्लंघन का दोषी पाया है.

सूत्रों के अनुसार, आयोग ने अपने पत्र में हेमंत सोरेन की बरहेट विधानसभा क्षेत्र से उनकी सदस्यता रद करने की अनुशंसा की है. हालांकि, उनके लिए राहत की बात यह है कि उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य करने का कोई जिक्र पत्र में नहीं किया गया है. अब राज्यपाल लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 2005 की धारा 192 (1) के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हेमंत सोरेन की विधानसभा की सदस्यता रद्द करने का निर्णय ले सकते हैं.

राज्यपाल पर नजरें टिकी
शुक्रवार को ही इस संबंध में राजभवन से अधिसूचना जारी की जा सकती है. हालांकि, राज्यपाल के दिल्ली से लौटने के बाद भी इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. बताया जा रहा है कि इस संबंध में राज्यपाल ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले में राय ली है.

फिलहाल, यह साफ नहीं है कि आयोग ने हेमंत को लंबी अवधि तक चुनाव लड़ने से रोकने को लेकर कोई अनुशंसा की है अथवा नहीं. वैसे राज्यपाल के निर्णय के आधार पर हो सकता है सरकार का मुखिया बदल जाए, लेकिन सत्ता के अंकगणित के अनुसार महागठबंधन की सरकार पर इसका कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है. इस मौके पर झारखंड में वक्त-बेवक्त होने वाली ऑपरेशन लोटस की चर्चा भी काफी तेज हो गई है.

हेमंत की इस सरकार में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के 30, कांग्रेस के 18, सीपीआई (एमएल) के एक तथा एनसीपी के एक यानी कुल 50 विधायक है. 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 42 है. वहीं, विपक्ष में बीजेपी के 26, आजसू के दो तथा दो निर्दलीय विधायक हैं. झारखंड विधानसभा में जेएमएम सबसे बड़ा दल है.

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