पसमांदा मुस्लिमों पर निकाय चुनाव में BJP का फोकस, 2024 के लिए कर रही ट्रायल

पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मुस्लिमों को जोड़ने की बात की थी। खासतौर पर पसमांदा मुस्लिमों पर फोकस करने का मंत्र पार्टी को दिया था और अल्पसंख्यक तबके को लुभाने के लिए स्नेह यात्रा निकालने की भी बात कही थी। अब भाजपा पसमांदा के अजेंडे पर चुनावी राजनीति में भी आगे बढ़ाने का प्लान बना रही है। इसकी शुरुआत भी यूपी से ही हो रही है, जो ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए अकसर चर्चा में रहा है। नवंबर या दिसंबर यूपी में नगर निगम के चुनाव होने वाले हैं और उसमें भाजपा अल्पसंख्यक वार्डों में बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है।

निकाय चुनाव के बहाने 2024 पर भी है भाजपा की नजर

भाजपा ऐसे वार्ड और नगर पंचायतों में भी अपने सिंबल पर प्रत्‍याशी उतार सकती है, जहां अधिकतर अल्‍पसंख्‍यक वोटर हैं। पार्टी के अल्‍पसंख्‍यक मोर्चे ने इस मिशन पर काम शुरू कर दिया है। प्रदेश भर में मोर्चा की बैठकों का सिलसिला शुरू हो रहा है। माना जा रहा है कि ये तैयारी सिर्फ निकाय चुनाव की नहीं बल्कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों को ध्‍यान में रखते हुए की जा रही है। इसी मकसद भाजपा लगातार पसमांदा मुसलमानों की बात कर रही है ताकि अल्पसंख्यकों में सेंध लग सके और एक बड़े वर्ग को साधा जा सके।

पसमांदा समाज के दानिश अंसारी को बनाया है मंत्री

मुस्लिमों में 85 फीसदी आबादी पसमांदा वर्ग की है, जबकि 15 से 20 फीसदी ही अशराफ हैं। भाजपा का फोकस है कि इस वर्ग को टारगेट करने रणनीति बनाई जाए। इसी कोशिश के तहत उसने मोहसिन रजा को हटाकर इस बार पसमांदा मुस्लिम दानिश आजाद अंसारी को योगी सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बनाया है। भाजपा की कोशिश है कि अल्पसंख्यक वर्ग के वोटों से दूरी न रखी जाए और उसमें भी यथासंभव सेंध लगाई जाए। 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर अभी तक के आम चुनावों में बीजेपी ने यूपी में अल्‍पसंख्‍यक समाज से उम्‍मीदवारों को खड़ा नहीं किया है। लेकिन निकाय चुनाव में उसकी रणनीति बदल सकती है।

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