भाजपा के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुकाबले मंडल की राजनीति

बिहार में नई सरकार बनाने के लिए नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और महागठबंधन के घटक दलों के साथ हाथ मिलाया। इस नए परिवर्तन से भाजपा के खिलाफ बड़ी विपक्षी एकता की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही जाति सह सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के आधार पर बढ़ी हुई जाति और पिछड़े वर्ग की लामबंदी के माध्यम से राज्य की राजनीति को भी नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश भी की जा सकती है। इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि महागठबंधन की सरकार जाति सह सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण को तेज गति से आगे बढ़ाएगी। लोकसभा चुनाव में बीजेपी के हिंदुत्व और उग्र राष्ट्रवाद से मुकाबला करने की पूरी तैयारी की जा रही है।सर्वे का काम शुरू होने के 45 दिनों में खत्म हो जाएगा। सर्वेक्षण पत्र के प्रारूप में जाति, शैक्षिक योग्यता, आय, संपत्ति और परिवारों की आय के स्रोत से संबंधित बड़ी संख्या में कॉलम होंगे। शीट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके बाद इस प्रारूप को डीएम को भेजा जाएगा और अधिकारियों का प्रशिक्षण प्रगणक के रूप में किया जाएगा। यह प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से चल रही है।एक सरकारी सूत्र ने कहा कि तैयारियों के आधार पर नवंबर के मध्य से डोर टू डोर सर्वेक्षण अस्थायी रूप से शुरू होगा और फरवरी 2023 की समय सीमा के अनुसार पूरा किया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि जिलाधिकारियों (डीएम) को पहले ही अधिकारियों और कर्मचारियों को जुटाने के लिए कहा गया है। शिक्षकों और संविदा कर्मियों के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों के साथ काम करने वालों को सर्वेक्षण की जिम्मेदारी दी जा सकती है। सूत्रों ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पहले से अधिसूचित इस सर्वेक्षण के प्रारूप पत्र में विभिन्न जाति समूहों से संबंधित व्यक्तियों की जानकारी एकत्र करने के लिए होंगे।

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