भाजपा ने तय कर लिया 2024 का फार्मूला?

सरकार में पूरब के वर्चस्व को देखते हुए संगठन में पश्चिम को वरीयता दी गई है यानि सरकार पूरब से तो संगठन पश्चिम से संचालित होगा।

नेतृत्व ने पश्चिम वालों की कम तरजीह मिलने की शिकायत दूर कर दी है।

दरअसल, मौजूदा सरकार में पूरब का दबदबा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पूर्वी उत्तर प्रदेश से हैं।

यही नहीं खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी भी पूर्वी यूपी में हैं। निर्वतमान प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह भी मूल रूप से पूर्वी यूपी के ही हैं। ऐसे में संगठन और सरकार दोनों में पूर्वी यूपी का ही दबदबा था।

पश्चिम को साधने की चुनौती

पार्टी अब मिशन-2024 की तैयारी में जुटी है। ऐसे में उसके सामने पश्चिमी यूपी को साधने की बड़ी चुनौती है, जहां विपक्ष का प्रदर्शन 2019 के लोकसभा और 2022 के विधानसभा चुनावों में अपेक्षाकृत ठीक रहा है।मुरादाबाद और सहारनपुर मंडल में भाजपा को विपक्षी गठबंधन से कड़ी चुनौती मिली थी। सहारनपुर, बिजनौर, नगीना और अमरोहा लोकसभा सीटें बसपा और मुरादाबाद व रामपुर सीटें सपा ने जीती थीं। वर्ष 2019 में पश्चिम की 27 में से आठ सीटें विपक्ष और 19 भाजपा ने जीती थीं।

कमजोर इलाकों को मजबूती देने का दांव

ऐसे में भाजपा ने प्रदेश महामंत्री संगठन और प्रदेश अध्यक्ष दोनों उन जिलों से दिए हैं, जहां पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनाव में शिकस्त मिली थी। हालिया विधानसभा चुनाव में भी भाजपा इस बेल्ट में प्रदर्शन प्रदेश के बाकी हिस्सों की तुलना में कमजोर रहा। संगठन महामंत्री धर्मपाल बिजनौर और भूपेंद्र चौधरी मुरादाबाद जिले से आते हैं। दोनों ही संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं।

भूपेंद्र चौधरी ही क्यों?

लाख टके का सवाल है कि कई केंद्रीय और राज्य सरकार के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, पदाधिकारियों की दावेदारी के बीच आखिर भूपेंद्र चौधरी की ही ताजपोशी क्यों की गई। दरअसल, भाजपा नेतृत्व अध्यक्ष पश्चिम से ही देना चाहता था। वहां से जो भी नाम चर्चा में थे, उनमें सांगठनिक अनुभव के मामले में भूपेंद्र चौधरी भारी पड़े। इसके अलावा भूपेंद्र गृहमंत्री अमित शाह के बेहद करीबी हैं। अच्छी छवि के कारण मुख्यमंत्री योगी भी उन्हें पसंद करते हैं।

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