राष्ट्रपति चुनावः शरद पवार, फारुख अबदुल्ला और गोपालकृष्ण गांधी हटे पीछे, अब इस नाम पर विचार कर रहा विपक्ष

तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने सोमवार को कहा कि गैर-भाजपा दल आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए संभावित संयुक्त उम्मीदवार के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के नाम पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर पिछले साल तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए भाजपा के पूर्व नेता सिन्हा के नाम का प्रस्ताव किया है और “तीन से चार” ने इसका समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी को इस तरह के फोन आए और वह भी सिन्हा को विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर पेश कर रही हैं।

इससे पहले, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी के नामों को प्रस्तावित किया गया था, लेकिन उन सभी ने अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘यशवंत सिन्हा अब तृकां नेता हैं। इसलिए, हम कोई भ्रम नहीं चाहते हैं कि प्रस्ताव हमारी ओर से किया गया गया है। उनके नाम पर तीन से चार पार्टियां सहमत हो चुकी हैं। अब अन्य दलों को फैसला करने दें।”

भारतीय जनता पार्टी नीत राजग के खिलाफ संयुक्त उम्मीदवार उतारने पर आम सहमति बनाने के लिए राकांपा प्रमुख शरद पवार द्वारा नई दिल्ली में मंगलवार को बुलाई गई प्रमुख विपक्षी दलों की बैठक में सिन्हा के नाम पर चर्चा की जाएगी। तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी बैठक में अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे। इससे पहले ममता बनर्जी ने पिछले हफ्ते राष्ट्रीय राजधानी में 22 गैर-भाजपा दलों की बैठक बुलाई थी और उनमें से 17 दलों ने बैठक में भाग लिया था। सिन्हा दो बार केंद्रीय वित्त मंत्री रह चुके है। पहली बार वह 1990 में चंद्रशेखर की सरकार में और फिर अटल बिहारी वाजपेयी नीत सरकार में वित्त मंत्री थे। वह वाजपेयी सरकार में विदेश मंत्री भी रहे।

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