सिकंदर नहीं बन पाया लेकिन मदारी का बंदर बन गया, फिर छलका आजम खां का दर्द

समाजवादी पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री आजम खां कभी खुद को सिकंदर बताते थे। आज उन्होंने कहा कि सिकंदर तो बन नहीं सका लेकिन मदारी का बंदर बन गया हूं। आजम खां का यह दर्द अलग अलग जिलों में पेशी को लेकर आया है। आजम खां की गुरुवार को मुरादाबाद के एमपी-एमएलए कोर्ट में पेशी हुई। पेशी के बाद आजम खां ने मीडिया से बात करते हुए इशारो ही इशारों में भाजपा सरकार पर कई हमले किये। आजम खां ने कहा कि जो जीता वह सिकंदर। हम जीते नहीं। इससे सिकंदर तो नहीं बन पाया लेकिन मदारी का बंदर जरूर बन गया हूं। बंदर बनकर कभी मुरादाबाद, कभी फिरोजाबाद तो कभी कहीं और पेशी के लिए दौड़ रहा हूं। उनका इशारा अपने ऊपर दर्ज मुकदमों और बार-बार तारीखों पर अलग अलग जिलों में पेशी को लेकर था। महंगाई के सवाल पर आजम ने तंज कसते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। आजम ने कहा कि महंगाई कहां है? आज सभी की कमाई इतनी ज्यादा है कि महंगाई पता कहां चल रही है। क्लर्क दो लाख रुपये महीना पा रहा है। आप सभी लोग भी पांच लाख रुपये महीना कमा रहे हैं। ऐसे में महंगाई कही है ही नहीं। कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा को लेकर कहा कि हम अंधे हैं। देखिये आंखों पर काला चश्मा लगा है। हमें तो कुछ दिखाई नहीं दे रहा है।

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