17 लाख दीपों से जगमगाई प्रभु श्रीराम की अवधपुरी

अद्भुत, अलौकिक, अविस्मरणीय…कल्पनातीत सौंदर्य। 17 लाख दीपों के प्रज्जवलित होते हुए अवधनगरी अयोध्या जगमगा उठी। जिसने भी देखा, अपलक निहारता ही रह गया। श्रद्धालु हों या सैलानी, सभी रामनगरी के कण-कण, रज-रज में अपने राम को निहार रहे थे। अयोध्या दीपोत्सव में आस्था, आह्लाद और आत्मीयता के दीप जले।
रविवार को अयोध्या दीपोत्सव अनूठा दिखा। सरयू तट पर जल रहे 17 लाख दीपों के बीच निहाल श्रद्धालुओं का हर्ष, उमंग और उल्लास देखते ही बन रहा था। अयोध्या के मंदिरों, छोटी गलियों से लेकर मुख्य मार्गों, सभी सरकारी, धार्मिक भवनों पर तो आकर्षक लाइटिंग की ही गई थी, नगरवासियों ने भी अपने घरों को सजाया-संवारा था।

दीप जलाकर उतारी सरयू मां की आरती

दीपोत्सव के अवसर पर राम की पैड़ी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक व यूपी सरकार के अन्य सहयोगियों ने दीप जलाकर सरयू मैया की आरती उतारी। पुष्पक विमान से अवधपुरी में राम-लक्ष्मण व मां सीता उतरीं तो हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई। मुख्यमंत्री ने रथ भी खींचा। अयोध्या वाली दीपावली में अपने सिरमौर के प्रति श्रद्धा का यह नजारा देख कई आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम की पैड़ी पर सबसे पहले 5 दीप जलाए। पहला दीप जल, दूसरा दीप अग्नि, तीसरा दीप वायु, चौथा पृथ्वी, पांचवां दीप आकाश के प्रतीक के रूप में प्रज्ज्वलित किया। इन दीपों का महत्व पौराणिक रूप से काफी माना जाता है। प्रधानमंत्री , मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामकथा पार्क अयोध्या में राम- सीता व लक्ष्मण की आरती उतारी और टीका लगाकर श्रद्धा निवेदित की। जबकि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व बृजेश पाठक ने राम परिवार व ऋषि-मुनियों का पूजन किया।

अयोध्या में दिखा एक भारत, श्रेष्ठ भारत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परिकल्पना एक भारत, श्रेष्ठ भारत सोमवार को अयोध्या में दिखा। यहां हर भाषा, शैली, जाति के लोग दीपोत्सव में आस्था का दीप प्रज्ज्वलित करने उमड़े। राम की पैड़ी के 37 घाटों पर 17 लाख दीप जलाए गए। इसके लिए राम मनोहर लोहिया विश्विद्यालय के प्रो. अजय प्रताप सिंह की देखरेख में 22 हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने दीप लगाए, उसमें तेल बाती डालकर दीप प्रज्ज्वलन में महती भूमिका निभाई। त्रेतायुग की अयोध्या सोमवार को कलियुग में भी अलौकिक दिखी। दीपोत्सव में सभी ने अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा के दीप जलाए। यहाँ रामायणकालीन व राम-सीता व ऋषि मुनियों समेत 35 स्वागत द्वार बनाये गए। 10 राज्यों के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी।

16 झांकियां निकलीं। दीपोत्सव के 17 लाख दीपों के लिए 22 हजार वालंटियरों ने 35 हजार लीटर सरसों का तेल दीपों में डाला। 2500 टन फूलों से अयोध्या की सजावट की गई। 50 हजार पताकाएं लगाई गईं। यहाँ रूस, श्रीलंका, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, फिजी, नेपाल व त्रिनिडाड व टोबैगो समेत 8 देशों की रामलीला का मंचन किया गया। 120 विदेशी कलाकारों की प्रतिभा को रामनगरी में मंच मिला। चौराहों पर रंगोली बनाकर समृद्धि की कामना की गई।

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