EWS आरक्षण के लिए पहले से मिल रहे फायदे छोड़ेगा एससी, एसटी वर्ग? सुप्रीम कोर्ट में बोली सरकार

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 फीसदी आरक्षण के मामले में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि पिछड़ी जनजातियों को पहले से ही आरक्षण मिल रहा है। ऐसे में यह आरक्षण केवल सामान्य वर्ग के लोगों को दिया जा सकता है। कोर्ट में अटॉर्नी  जनरल केके वेणुगापाल ने मंग्लवार को कहा कि पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग पहले से ही रिजर्वेशन के फायदे ले रहे हैं। सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को इस कानून के तहत लाफ मिलेगा जो कि क्रांतिकारी साबित होगा। बता दें कि जनवरी 2019 में 103वें संविधान संशोधन के तहत EWS कोटा लागू किया गया था। अब इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। पांच जजों की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया है कि एससी,एसटी और  ओबीसी में भी गरीब लोग हैं तो फिर यह आरक्षण केवल सामान्य वर्ग के लोगों को क्यों दिया जाता है। इससे 50  फीसदी के आरक्षण नियम का उल्लंघन होता है। पहले से ही ओबीसी को 27  फीसदी, एससी को 15 और एसटी के लिए 7.5 फीसदी कोटा फिक्स किया गया है। ऐसे में 10 फीसदी का ईडब्लूएस कोटा 50 फीसदी के नियम को तोड़ता है। वेणुगोपाल ने कहा कि यह कानून आर्टिकल 15 (6) और 16 (6) के मुताबिक ही है। यह पिछड़ों और वंचितों को ऐडमिशन और नौकरी में आरक्षण देता है और 50 फीसदी की सीमा को पार नहीं करता है। केके वेणुगोपाल ने कहा कि संविधान में एससी और एसटी के लिए आरक्षण अलग से अंकित है। इसके मुताबिक संसद में, पंचायत में और स्थानीय निकायों में और प्रमोशन में भी उन्हें आरक्षण दिया जाता है। अगर उनके पिछड़ेपन को ध्यान में रखते हुए हर तरह का फायदा उन्हें दिया जा रहा है तो EWS कोटा पाने के लिए वे ये सारे फायदे छोड़ने को तैयार होंगे। 

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